India’s external intelligence agency, the Research and Analysis Wing (RAW)

भारत की इंटेलीजेंस एजेंसी रॉ यानी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग, देश की इकलौती इंटेलीजेंस एजेंसी है जिसका मकसद दुश्‍मनों की साजिशों का पता लगाना है।

आज, हम आपके सामने रिसर्च ऐंड अनैलिसिस विंग (रॉ) से जुड़े ऐसे फैक्ट्स लेकर आ रहे हैं जो आपकी जानकारी को तो बढ़ाएगा ही, आपको गौरवान्वित भी कर देगा:->

1.  RAW is( Research and Analysis Wing)  की कोई वेबसाइट नहीं है, इसलिए उनके लिए एक जासूस बनने के लिए आवेदन करना कठिन है | राॅ में शामिल होने का सबसे अच्छा तरीका हैं UPSC पास करो और IPS या IFS पद पर कार्यरत हो जाओ.

2.  रॉ का कानूनी दर्जा अभी भी अस्पष्ट ही हैं। आखिर क्यों रॉ एक एजेंसी नहीं बल्कि विंग हैं?

3. रॉ का गठन 1962 के भारत-चीन युद्ध और 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद तब किया गया, जब इंदिरा गांधी सरकार ने भारत की अग्रिम सुरक्षा की जरूरत को महसूस किया।

4. राॅ पर RTI नही डाल सकते, क्यों कि यह देश की सुरक्षा का मामला हैं.

5. राॅ में शामिल होने के लिए आपके माता-पिता भारतीय होने जरूरी हैं.

6. रॉ का सिद्धांत ‘धर्मो रक्षति रक्षितः’ है, जिसका मतलब है कि जो शख्स धर्म की रक्षा करता है वह       हमेशा सुरक्षित रहता है।

7. राॅ सीधी अपनी रिपोर्ट प्रधानमंत्री को भेजती है. इसके डायरेक्टर का चुनाव, सेक्रेटरी(रिसर्च) द्वारा होता हैं.

8. राॅ में शामिल होना कोई मालामाल होना नही हैं, वो आदमी इससे दूर ही रहे जो रिश्वत लेने वाले या लालची हो, आपका राॅ में शामिल होने के सपना एक राज होना चाहिए और ये राज किसी को न बताएं.

9. अगर आप RAW  शामिल  होना चाहते है तो सबसे पहले आपके माता-पिता और आप का भारतीय होना ज़रूरी   है 

10.  शुरुआत में, रॉ में नियुक्ति आईबी, इंडियन पुलिस सर्विस, मिलिट्री या रेवेन्यू डिपार्टमेंट से होती है। हालांकि, खुफिया एजेंसी ने यूनिवर्सिटीज से स्टूडेंट्स को लेने की प्रक्रिया शुरू नहीं की है।

11.  फाइनैंशियल, इकनॉमिक अनैलिसिसि, स्पेस टेक्नॉलजी, इंफॉर्मेशन सिक्यॉरिटी, एनर्जी सिक्यॉरिटी और साइंटिफिक नॉलेज जैसी जानकारी ट्रेनीज को दी जाती हैं।

12. अपने विभाग से कुछ भी छिपाने की कोशिश न करें। अगर आपको लगता है कि होशयारी में आप RAW को मात दे सकते हैं तो आप गलत हैं.

13. रिक्रूट को किसी एक फॉरेन लैंग्वेज में स्पेशलाइज किया जाता है और उसे जियो स्ट्रैटिजिक अनैलिसिस से भी परिचित कराया जाता है। सीआईए, केजीबी, आईएसआई, मोसाद, एमआई6 जैसी घातक खुफिया एजेंसियों की केस स्टडीज भी पढ़ाई जाती है।

14. बांग्लादेश का उदयः 1970 के दशक के शुरुआती वर्षों में जब बांग्लादेश की नींव डालने की कोशिश जारी थी, उस समय RAW ने सूचनाओं के आदान-प्रदान में बेहतरीन भूमिका निभाई। मुक्ति वाहिनी की रॉ ने भरपूर मदद की, जिसके परिणाम स्वरूप पूर्वी पाकिस्तान को नया नाम ‘बांग्लादेश’ मिला

15.  भारत के पहले न्यूक्लिटर प्रोग्राम को रहस्य में रखने के लिए ऑपरेशन स्माइलिंग बुद्धा नाम रॉ ने ही दिया था। इस मिशन में रॉ को भारत में ही डिप्लॉय किया गया था। नतीजा आपको पता है कि किस तरह भारत द्वारा 15 किलोटन प्लुटोनियम डिवाइस के विस्फोट के बाद दुनिया में हमारी सामरिक साख में कैसा परिवर्तन आया और अमेरिका और पाक सहित सभी पश्चिमी देश ठगे से रह गए।

16.  . एक रॉ जासूस की ज़िन्दगी, फिल्मों में दर्शाई गई जासूस की ज़िन्दगी से कहीं से भी मेल नहीं खाती. लेकिन जासूसी में अव्वल होते हैं| रॉ में ड्यूटी पर तैनात अधिकारी को बंदूक नहीं मिलती। बचाव के लिए ये अपनी तेज बुद्धि का इस्तेमाल करते हैं.

17.   यदि राॅ का एजेंट दूसरे देश में जासूसी करता पकड़ लिया जाए तो अपने देश की सरकार ही उनसे पल्ला झाड़ लेती है, उनकी किसी तरह की कोई सहायता नहीं करती हैं। और अंत में जब उनकी दुशमन देश में मौत हो जाती है तो उनको अपने वतन की मिट्टी तक नसीब नहीं होती हैं। कुछ ऐसा ही हुआ था भारत के रविन्द्र कौशिक के साथ.

18. रॉ की सभी चीफ पाकिस्तान या चीन के एक्सपर्ट होते हैं। भारत के वर्तमान सुरक्षा सलाहकार ‘अजित डोभाल’ ने कई वर्ष गुप्त रूप से पाकिस्तान में जासूसी करते हुए बिताये है |

19. रॉ ने पाकिस्तान के सैन्य प्रमुख रहे परवेज मुशर्रफ और उनके चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल मोहम्मद अजीज की बातचीत को टैप किया था। इस टैपिंग से करगिल घुसपैठ में पाकिस्तान की संलिप्तता की बात की पुष्टि हो गई।

20.  राॅ में शामिल होने का सबसे अच्छा तरीका हैं UPSC पास करो और IPS या IFS पद पर कार्यरत हो जाओ.